भगवान की लीला
बहुत सराही
अब मानव की लीला को सराहो.
चार पाँव चलने का आदेश था
भगवान् का.
मानव खड़ा हुआ दो पाँव
दो हाथ से पकडे चाँद-सूरज
अरण्य में से अग्नि चुराई
हाथ में सजे अस्थि के अस्त्र-शस्त्र.
सूर्य-चंद्र देख कर बनाया चक्र.
हल बना कर धरती जोत कर खोजी सीता.
अरण्य गिरिकंदरा छोड़ कर
आया सिन्धु तीर.
भापयंत्र बनाकर पृथ्वी की गति को
परिवर्तित किया प्रगति में.
आसमान से उतारी बीजली.
पहाड़ तोड़ कर लोह्पथ बनाए
पंछी देखकर उड़ते हवाई जहाज उडाये.
कोम्प्यूटर की की कमाल
पलमें विदेश बात कराये मोबाइल.
अवकाश में उपग्रह तैरते
चंद्र पर ठहराए चरण.
मंगल पर यान अवतरण
लघुरुद्र सूर्य समान खोजी अणु ऊर्जा
चाहे तो ध्रुजाए ब्रह्मांड
तीर धनुष से पहुंचा मिसाइल
दरियेमें बैठ कर हिन्दू कुश पहाड़ों में
मचा दे खलबली.
भगवान् की लीला
बहुत सराही,
अब मानव की लीला को सराहो.
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